भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का आकार क्षैतिज आयताकार है जो तीन रंगो (केसरी, सफेद और हरा) रंग से बना है। इसकी सफेद पट्टी के बीच में अशोक चक्र नीले रंग का होता है जिसमें पहिए का आरा 24 होते हैं। इसे राष्ट्रीय ध्वज 22 जुलाई 1947 में रखी गयी निर्वाचन सभा में चुना गया और 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रभुत्व का आधिकारिक ध्वज बन गया। इस ध्वज का अनुपात 2:3 है और इस ध्वज की रचना श्री पिंगली वेंकैया ने की थी।
भारतीय कानून के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज 'खादी' से बनाया जाना है। 'खादी' एक विशेष प्रकार का हाथों से काता हुआ रेशमी कपड़ा होता है जिसे हमारे राष्ट्र पिता बापू (महात्मा गांधी) ने प्रसिद्ध किया था। ध्वज की विनिर्माण प्रक्रिया और विशेष विवरण भारतीय कार्यालय मानकों द्वारा रखी जाती है। ध्वज बनाने का अधिकार 'खादी विकास और ग्राम उद्योग आयोग' रखता है जो इसे क्षेत्रीय समूहों में आबंटित करता है। 2009 के अनुसार 'कर्नाटक खादी ग्राम उद्योग सम्युक्ता संघ' भारतीय ध्वज का एकमात्र उत्पादक है।
ध्वज का उपयोग और दूसरे राष्ट्रीय चिन्हों संबंधित कानून 'भारत के ध्वज नीयम संग्रह' द्वारा शासित किए जाते हैं। नागरिकों को ध्वज का व्यक्तिगत रूप से उपयोग करना निषिद्ध है। नागरिकों को केवल राष्ट्रीय त्यौहार अर्थात गणतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता दिवस एवं गांधी जयंती पर ध्वज का मूल संकेत के रूप में उपयोग करने की अनुमति है। दो प्रमुख धर्मों के संबंध को दर्शाने के लिए, ध्वज की रचना 1921 में लाल और हरे रंग को जोड़कर की गई थी। लाल रंग हिन्दू और हरा रंग मुस्लिम धर्म से संबंधित था लेकिन महातमा गांधी ने दूसरे धर्मों को भी संबंधित करने केलिए दोनों रंगों के बीच सफेद रंग लगा दिया। श्री लाला हंसराज सोंधी ने सुझाव दिया कि महात्मा गांधी के धर्मयुद्ध के संबंध में, ध्वज के केन्द्र में चरखा लगाया जाना चाहिए।
अगस्त 1931 में ध्वज के लाल रंग को गाढ़े केसरी रंग में बदल दिया गया। मूल प्रस्ताव के साम्प्रदायिक संबंधों से बचने के लिए; ध्वज का नया आरोपण केसरी, सफेद और हरे रंग से बनाया गया। ध्वज की केसरी पट्टी जो सबसे ऊपर होती है, साहस और बलिदान को दर्शाती है। ध्वज की सफेद पट्टी जो केसरी और लाल पट्टी के मध्य होती है, अमन या शांति या एकता और सत्यता को दर्शाती है। ध्वज की हरी पट्टी जो सबसे नीचे होती है, वीरता और भक्ति या निष्ठा या इमानदारी को दर्शाती है। ध्वज के केन्द्र में चरखे की जगह नीले रंग का अशोक चक्र लगा दिया गया जिसे धर्म चक्र भी कहा जता है और कानून का पहिया भी कहा जता है।

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