कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है,
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
स्वतंत्र देश की पहचान है,
भारत का सम्मान है,
ऊँचाई पर लहराकर,
बढ़ाता देश की शान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
तीन रंगों से बना तिरंगा,
भारत माँ की शान है,
इसका सम्मान करना,
हर नागरिक का अभिमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तीनों रंग बस रंग नहीं,
सजावट का ढंग नहीं,
सैकड़ों लोगों के सपनों का,
बलिदान का निशान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
शहीद हुए हर वीर की,
तिरंगे में बसी जान है,
केसरिया रंग तिरंगे का,
साहस और बलिदान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
वीरों के संघर्ष की,
सफलता की पहचान है,
सफेद रंग तिरंगे का,
शांति का प्रतीक महान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
देश की हर हरियाली का,
खुशहाली का निशान है,
हरा रंग समृद्धि का,
देश की नई पहचान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
नीला चक्र अशोक का,
मानवीय गुण दर्शाता है,
गति ही जीवन है और
ठहराव मृत्यु कहलाता है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
देश का वीर सैनिक जब,
देता अपनी जान है,
तिरंगे में लिपटने का,
मिलता उसको सम्मान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तिरंगे के रंग में कपड़ा बनाना,
फिर ट्रेंड बनाकर फैलाना,
इसको पहन देशभक्ति दिखाना,
देशभक्ति का अपमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तिरंगे के रंग की सजावट करना,
तिरंगे के रंग की वस्तु बनाना,
तिरंगे के रंग में खुद को रंगना,
तिरंगे का अपमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तीन रंगों से बना तिरंगा,
भारत माँ की शान है,
इसका सम्मान करना,
हर नागरिक का अभिमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
तीनों रंग बस रंग नहीं,
सजावट का ढंग नहीं,
सैकड़ों लोगों के सपनों का,
बलिदान का निशान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
शहीद हुए हर वीर की,
तिरंगे में बसी जान है,
केसरिया रंग तिरंगे का,
साहस और बलिदान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
वीरों के संघर्ष की,
सफलता की पहचान है,
सफेद रंग तिरंगे का,
शांति का प्रतीक महान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
देश की हर हरियाली का,
खुशहाली का निशान है,
हरा रंग समृद्धि का,
देश की नई पहचान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
नीला चक्र अशोक का,
मानवीय गुण दर्शाता है,
गति ही जीवन है और
ठहराव मृत्यु कहलाता है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
देश का वीर सैनिक जब,
देता अपनी जान है,
तिरंगे में लिपटने का,
मिलता उसको सम्मान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
तिरंगे के रंग में कपड़ा बनाना,
फिर ट्रेंड बनाकर फैलाना,
इसको पहन देशभक्ति दिखाना,
देशभक्ति का अपमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
तिरंगे के रंग की सजावट करना,
तिरंगे के रंग की वस्तु बनाना,
तिरंगे के रंग में खुद को रंगना,
तिरंगे का अपमान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
प्लास्टिक का तिरंगा नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा टैटू नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा स्टिकर नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा हेयरबैंड नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा ब्रेसलेट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा चूड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा फ्रॉक नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा स्कर्ट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा शर्ट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की टोपी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की पगड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की साड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की पैंट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे का पहनावा नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे पर लिखावट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा गुब्बारा नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे का खिलौना नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की वस्तु नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे जैसी सजावट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा झुकाना नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा राष्ट्र गौरव है,
देश की पहचान है,
ऊँचाई पर लहराना,
इसकी असली शान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
जागरूकता फैलाएँगे,
गौरव इसका बढ़ाएँगे,
शिक्षित भारत बनाएँगे,
करते हम ऐलान हैं।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तिरंगे के सम्मान में,
कासिम का ये नारा है,
मान बढ़ाकर, मर्यादा निभाकर,
रखना सदा सम्मान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
तिरंगा टैटू नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा स्टिकर नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा हेयरबैंड नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा ब्रेसलेट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा चूड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा फ्रॉक नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा स्कर्ट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा शर्ट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की टोपी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की पगड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की साड़ी नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की पैंट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे का पहनावा नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे पर लिखावट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा गुब्बारा नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे का खिलौना नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे की वस्तु नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगे जैसी सजावट नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा झुकाना नहीं चाहिए। नहीं चाहिए। नहीं चाहिए।
तिरंगा राष्ट्र गौरव है,
देश की पहचान है,
ऊँचाई पर लहराना,
इसकी असली शान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
जागरूकता फैलाएँगे,
गौरव इसका बढ़ाएँगे,
शिक्षित भारत बनाएँगे,
करते हम ऐलान हैं।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
तिरंगे के सम्मान में,
कासिम का ये नारा है,
मान बढ़ाकर, मर्यादा निभाकर,
रखना सदा सम्मान है।।
कपड़ा या श्रृंगार नहीं, तिरंगा भारत की शान है।।
दिल से करें प्रणाम इसे, यह देश का अभिमान है।।
यह मोहम्मद कासिम द्वारा लिखी छठवीं कविता है जो 2 अगस्त 2026 में लिखी गई है।


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